करनाल की ये नई गन्ने की किस्म तोड़े पैदावार के सारे रिकॉर्ड

करनाल की ये नई गन्ने की किस्म

करनाल स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान से जुड़ी नई गन्ने की किस्म CO-18022 यानी कर्ण-18 किसानों के बीच चर्चा में है। इस किस्म को उत्तर-पश्चिम भारत के लिए 2025 में जारी किया गया है और परीक्षणों में इसकी उपज तथा चीनी की मात्रा के अच्छे नतीजे सामने आए हैं।

खास बात यह है कि कर्ण-18 को पुरानी किस्मों की तुलना में बेहतर उत्पादन और अच्छी चीनी रिकवरी के लिए विकसित किया गया है। हालांकि किसान इसे अपने खेत में लगाने से पहले अपने क्षेत्र और मिट्टी के हिसाब से कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

कर्ण-18 गन्ने की किस्म क्यों खास है?

कर्ण-18 को करनाल के गन्ना प्रजनन संस्थान में विकसित किया गया है। इसका वैज्ञानिक नाम CO-18022 है। इसे उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में खेती के लिए जारी किया गया है।

इस किस्म को खास तौर पर ऐसी फसल के रूप में विकसित किया गया है जिसमें अच्छी गन्ने की उपज के साथ चीनी की मात्रा भी बेहतर रहे। उपलब्ध परीक्षण आंकड़ों में इसकी औसत गन्ना उपज करीब 98.65 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है।

कर्ण-18 की पैदावार कितनी है?

परीक्षणों में CO-18022 की औसत गन्ना उपज 98.65 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। इसकी सुक्रोज मात्रा करीब 18.17 प्रतिशत रही।

इसके अलावा उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के परीक्षणों में इसकी CCS उपज करीब 12.59 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो क्षेत्र के मानक CO-767 की तुलना में करीब 30.72 प्रतिशत अधिक बताई गई है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसान को खेत में बिल्कुल इतनी ही पैदावार मिलेगी। असली उत्पादन मिट्टी, मौसम, पानी, खाद, बीज की गुणवत्ता और खेती के तरीके पर निर्भर करेगा।

जानकारीकर्ण-18 CO-18022
किस्म का नामकर्ण-18
वैज्ञानिक नामCO-18022
औसत गन्ना उपज98.65 टन/हेक्टेयर
सुक्रोज18.17%
CCS उपज12.59 टन/हेक्टेयर
पकने का समयकरीब 12 महीने
क्षेत्रउत्तर-पश्चिम भारत

पुरानी किस्म से क्यों बेहतर मानी जा रही है?

कर्ण-18 को ऐसी किस्म के रूप में विकसित किया गया है जो अच्छी उपज के साथ चीनी मिलों के लिए भी बेहतर परिणाम दे सके। परीक्षणों में इसकी CCS उपज क्षेत्र के मानक की तुलना में बेहतर रही है।

इसमें खारेपन और सूखे जैसी परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता भी बताई गई है। साथ ही इसे रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बड़ी समस्याओं के प्रति बेहतर माना जा रहा है।

लेकिन किसी भी नई किस्म की तरह इसका प्रदर्शन हर खेत में एक जैसा होना जरूरी नहीं है। इसलिए केवल रिकॉर्ड उपज के आंकड़े देखकर बड़े क्षेत्र में इसकी खेती शुरू करना सही तरीका नहीं होगा।

कर्ण-18 की खेती कब की जा सकती है?

कर्ण-18 करीब 12 महीने में तैयार होने वाली किस्म है। इसकी खेती क्षेत्र और मौसम के अनुसार बसंत तथा शरद दोनों मौसम में की जा सकती है।

उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में बसंत की बुवाई आम तौर पर फरवरी-मार्च और शरद की बुवाई सितंबर-अक्टूबर के आसपास की जाती है। लेकिन किसान को अपने जिले की कृषि सलाह और चीनी मिल की बुवाई व्यवस्था को ध्यान में रखना चाहिए।

किसानों के लिए इसके क्या फायदे हो सकते हैं?

नई किस्म का सबसे बड़ा फायदा इसकी संभावित उपज और चीनी उत्पादन से जुड़ा है। अगर खेत में सही प्रबंधन किया जाए तो किसान को अच्छी गन्ना उपज के साथ मिल में बेहतर रिकवरी का लाभ मिल सकता है।

कर्ण-18 से जुड़े प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:

  • अच्छी गन्ना उपज की क्षमता।
  • करीब 18 प्रतिशत सुक्रोज का परीक्षण परिणाम।
  • CCS उपज में क्षेत्र के मानक से बेहतर प्रदर्शन।
  • रेड रॉट और टॉप बोरर के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया बताई गई है।

बीज लेने से पहले किसान क्या ध्यान रखें?

नई किस्म की खेती शुरू करने से पहले सबसे जरूरी बात अच्छी और प्रमाणित पौध सामग्री लेना है। खेत में पहले से किसी दूसरी किस्म का गन्ना देखकर उसे बीज के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय भरोसेमंद स्रोत से स्वस्थ बीज लेना बेहतर रहता है।

करनाल स्थित ICAR-Sugarcane Breeding Institute के क्षेत्रीय केंद्र में नई और लोकप्रिय गन्ने की किस्मों के गुणवत्तापूर्ण बीज और पौध तैयार करने का काम किया जाता है। संस्थान की जानकारी के अनुसार वहां CO-0118, CO-15023 और CO-17018 जैसी किस्मों की पौध भी तैयार की जाती है।

किसान अपने इलाके में उपलब्धता और सही बीज स्रोत की जानकारी स्थानीय कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या संबंधित गन्ना संस्थान से ले सकते हैं।

क्या कर्ण-18 हर किसान के लिए सबसे अच्छी किस्म है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा। किसी एक गन्ने की किस्म को हर खेत के लिए सबसे बेहतर नहीं माना जा सकता। मिट्टी, पानी, मौसम, बुवाई का समय और क्षेत्र के अनुसार किस्म का प्रदर्शन बदल सकता है।

इसलिए कर्ण-18 को लगाने से पहले किसान अपने खेत की स्थिति और स्थानीय गन्ना विशेषज्ञ की सलाह जरूर देखें। खासकर बड़े क्षेत्र में लगाने से पहले सीमित क्षेत्र में इसका प्रदर्शन देखना समझदारी हो सकती है।

करनाल से विकसित कर्ण-18 यानी CO-18022 गन्ने की नई किस्म किसानों के लिए एक promising विकल्प के रूप में सामने आई है। परीक्षणों में करीब 98.65 टन प्रति हेक्टेयर गन्ना उपज और 18.17 प्रतिशत सुक्रोज दर्ज किया गया है।

इसका प्रदर्शन क्षेत्र के मानक की तुलना में भी बेहतर रहा है, लेकिन किसान यह याद रखें कि परीक्षण में मिली उपज हर खेत में मिलना जरूरी नहीं है। सही बीज, मिट्टी के अनुसार खाद-पानी और बेहतर खेती प्रबंधन ही असली उत्पादन तय करेंगे।

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