Best Sugarcane Varieties for UP Farmers in 2026, गन्ने की कौन की वैरायटी लेगी CO-0238 की जगह?

Best Sugarcane Varieties for UP Farmers in 2026

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के बीच इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि CO-0238 के बाद कौन सी नई गन्ने की किस्म बेहतर विकल्प बन सकती है। CO-0238 लंबे समय से पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में लोकप्रिय रही है। इसकी अच्छी उपज और चीनी रिकवरी के कारण इसे किसानों ने बड़े पैमाने पर अपनाया है।

लेकिन अब किसान ऐसी किस्मों की तलाश कर रहे हैं जो अच्छी पैदावार के साथ रोगों और बदलते मौसम का भी बेहतर सामना कर सकें। 2026 में CO-15023 का नाम CO-0238 के संभावित विकल्प के रूप में खास तौर पर सामने आता है। इसके साथ CO-0118 और कुछ नई किस्मों पर भी काम और परीक्षण चल रहा है।

CO-0238 को बदलने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?

CO-0238 को उत्तर भारत की प्रमुख गन्ने की किस्मों में गिना जाता है। ICAR के अनुसार यह उत्तर-पश्चिमी उपोष्ण क्षेत्र में जल्दी पकने वाली और ज्यादा उपज देने वाली किस्म के रूप में काफी लोकप्रिय रही है।

उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक एक ही किस्म पर ज्यादा निर्भर रहने से रोग और मौसम से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। इसी वजह से वैज्ञानिक संस्थान नई किस्मों को तैयार करने और खेतों में उनकी जांच करने पर लगातार काम कर रहे हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि CO-0238 को हर जगह तुरंत बंद कर देना चाहिए। किसान को अपने क्षेत्र, मिट्टी, पानी और स्थानीय गन्ना विभाग की सलाह के अनुसार ही किस्म चुननी चाहिए।

CO-15023 क्यों बन सकती है CO-0238 का विकल्प?

CO-15023 इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली नई किस्मों में से एक है। ICAR-Sugarcane Breeding Institute ने इसे जल्दी पकने वाली किस्म के रूप में विकसित किया है और इसके प्रदर्शन को CO-0238 के संभावित विकल्प के रूप में भी देखा गया है।

यह किस्म उत्तर भारत के उपोष्ण क्षेत्रों के लिए खास रुचि की है। ICAR के परीक्षणों में CO-15023 ने उपोष्ण परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन दिखाया है। हालांकि किसी भी किस्म को पूरे उत्तर प्रदेश में हर खेत के लिए सबसे अच्छी कहना सही नहीं होगा।

किस्ममुख्य जानकारीUP के लिए स्थिति
CO-0238ज्यादा उपज और अच्छी चीनी रिकवरी के लिए प्रसिद्धपुरानी लोकप्रिय किस्म
CO-15023जल्दी पकने वाली नई किस्म, CO-0238 के विकल्प के रूप में विकसितसंभावित बेहतर विकल्प
CO-0118जल्दी पकने वाली किस्मपश्चिमी और मध्य UP में उपयोगी
CO-17018नई उपोष्ण किस्मों में शामिलक्षेत्र के अनुसार परीक्षण और उपयोग
CO-18022नई विकसित किस्मआगे के प्रदर्शन पर ध्यान जरूरी

CO-15023 की खास बातें क्या हैं?

CO-15023 को केवल नाम बदलने के लिए नहीं लाया गया है। इसे ऐसी किस्म के रूप में विकसित किया गया है जो उपोष्ण क्षेत्र में अच्छी उपज और चीनी उत्पादन देने की क्षमता रखती है।

ICAR-SBI के अनुसार CO-15023 का बीज उत्पादन और वितरण भी किया गया है। संस्थान के रिकॉर्ड में उत्तर प्रदेश को इस किस्म के सिंगल-बड सेट के बड़े प्राप्तकर्ताओं में शामिल किया गया है।

इससे पता चलता है कि इस किस्म को केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि किसानों और गन्ना क्षेत्र से जुड़े संस्थानों तक इसके अच्छे बीज को पहुंचाने पर भी काम हुआ है।

CO-0118 भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प

CO-0118 भी उत्तर-पश्चिमी भारत के लिए पुरानी और अच्छी तरह जांची गई किस्मों में शामिल है। ICAR के अनुसार यह जल्दी पकने वाली किस्म है और पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड तथा पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के लिए इसकी सिफारिश की गई है।

इस किस्म की एक खास बात यह है कि इसे सूखे और पानी भरने जैसी परिस्थितियों के प्रति कुछ सहनशीलता के लिए भी जाना जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि यह हर मौसम और हर खेत में बिना नुकसान के बढ़ेगी।

इसलिए जहां CO-0118 पहले से अच्छी तरह चल रही है, वहां किसान इसे भी एक विकल्प के रूप में देख सकते हैं।

2026 में नई किस्मों पर भी चल रहा है काम

उत्तर प्रदेश में सिर्फ CO-15023 और CO-0118 पर ही ध्यान नहीं है। यूपी के गन्ना अनुसंधान संस्थानों में कई नई किस्मों और लाइनों का परीक्षण चल रहा है।

UP Council of Sugarcane Research की 2024-25 की रिपोर्ट में कई नई प्रविष्टियों का जिक्र है, जिनका अलग-अलग परीक्षणों में CO-0238 जैसी मानक किस्मों से तुलना की गई। कुछ प्रविष्टियों ने खास परीक्षणों में CO-0238 से ज्यादा गन्ना उपज या CCS उपज दिखाई, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे सभी किस्में अभी पूरे उत्तर प्रदेश में खेती के लिए सबसे अच्छी या सामान्य सिफारिश बन चुकी हैं।

यही बात किसानों के लिए समझना बहुत जरूरी है। किसी एक परीक्षण में अच्छा प्रदर्शन करने वाली किस्म और पूरे राज्य के लिए आधिकारिक रूप से सुझाई गई किस्म एक ही बात नहीं होती।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए भी नई किस्म

पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए 2025 में CoSe 17451 (Krishna) नाम की एक जल्दी पकने वाली किस्म जारी की गई है। यूपी के गन्ना अनुसंधान संस्थान के अनुसार इसे पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सामान्य खेती के लिए जारी किया गया है।

इससे साफ है कि आने वाले समय में पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक ही किस्म पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग इलाकों के लिए अलग किस्मों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

किसान 2026 में कौन सी किस्म चुनें?

इस सवाल का जवाब केवल किस्म के नाम से नहीं दिया जा सकता। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश की मिट्टी, मौसम और पानी की स्थिति अलग-अलग है।

अगर किसान CO-0238 की जगह नई किस्म लगाने की सोच रहा है, तो पहले अपने क्षेत्र में उस किस्म का प्रदर्शन और गन्ना विभाग या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह देखना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

खास तौर पर ये बातें देखें:

  • आपके इलाके में किस्म की खेती पहले से हो रही है या नहीं।
  • स्थानीय गन्ना विभाग या चीनी मिल ने उस किस्म को मान्यता या सलाह दी है या नहीं।
  • प्रमाणित और स्वस्थ बीज सामग्री आसानी से मिल रही है या नहीं।
  • आपके खेत की मिट्टी, पानी और रोग की स्थिति के लिए किस्म उपयुक्त है या नहीं।

केवल नई किस्म लगाने से पैदावार नहीं बढ़ेगी

किसान अक्सर सोचते हैं कि नई किस्म लगाने से अपने आप पैदावार बहुत बढ़ जाएगी। ऐसा जरूरी नहीं है। किस्म के साथ बीज की गुणवत्ता, खेत की तैयारी, पौधों की संख्या, खाद, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और रोग प्रबंधन भी उतने ही जरूरी हैं।

ICAR-SBI के अनुसार स्वस्थ और शुद्ध बीज सामग्री का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकता है। संस्थान ने tissue culture से तैयार स्वस्थ पौध सामग्री के इस्तेमाल से उत्पादकता में सुधार की संभावना भी बताई है।

इसलिए किसान सिर्फ किस्म बदलने के बजाय पूरी फसल प्रबंधन व्यवस्था पर ध्यान दें।

2026 में अगर किसान CO-0238 के विकल्प की तलाश कर रहे हैं, तो CO-15023 सबसे महत्वपूर्ण संभावित विकल्पों में से एक है। ICAR-SBI के रिकॉर्ड में इसे CO-0238 के संभावित substitute के रूप में भी दर्ज किया गया है।

इसके अलावा CO-0118 पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के लिए एक स्थापित विकल्प है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में CoSe 17451 जैसी नई किस्में भी सामने आई हैं। नई किस्म चुनने से पहले किसान अपने जिले और चीनी मिल क्षेत्र में उसकी सिफारिश, बीज की उपलब्धता और स्थानीय प्रदर्शन जरूर जांचें।

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