धान मे सभी खरपतवार 100% खत्म, धान में खरपतवार रोकने की सही दवा, किसान जरूर जानें

धान मे सभी खरपतवार 100% खत्म

धान की फसल में खरपतवार समय पर नहीं रोके जाएं तो वे धान के पौधों के साथ पानी, खाद और जगह के लिए मुकाबला करते हैं। इससे फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और उपज पर भी असर पड़ सकता है। लेकिन सभी खेतों में एक ही खरपतवारनाशी या एक ही मात्रा सही नहीं होती। धान की रोपाई या सीधी बुवाई, खरपतवार की किस्म और फसल की अवस्था देखकर दवा चुनना जरूरी है।

धान में कौन-कौन से खरपतवार बड़ी परेशानी बनते हैं?

धान के खेत में घास वाले खरपतवार, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार और मोथा जैसे खरपतवार दिखाई दे सकते हैं। इनकी पहचान करना जरूरी है, क्योंकि हर दवा हर तरह के खरपतवार पर एक जैसा असर नहीं करती। ICAR की कृषि सलाह में भी धान के खेतों में अलग-अलग प्रकार के खरपतवारों के लिए अलग खरपतवारनाशी और अलग समय पर इस्तेमाल की सलाह दी गई है। इसलिए केवल दुकान से कोई भी दवा लेकर छिड़क देना सही तरीका नहीं है।

रोपाई वाले धान में खरपतवार की दवा कब डालें?

रोपाई वाले धान में शुरुआती दिनों में खरपतवार रोकना बहुत जरूरी होता है। ICAR की कृषि सलाह में कुछ क्षेत्रों के लिए रोपाई के 2 से 5 दिन के अंदर, खेत में हल्का पानी रहने की स्थिति में कुछ शुरुआती खरपतवारनाशी इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इनमें ब्यूटाक्लोर, प्रीटिलाक्लोर और पाइराजोसल्फ्यूरॉन-एथाइल जैसे विकल्प शामिल हैं। कौन सा विकल्प और कितनी मात्रा सही है, यह आपके क्षेत्र और उत्पाद के लेबल पर दी गई फसल संबंधी सिफारिश के अनुसार तय करना चाहिए।

अगर खरपतवार पहले ही निकल आए हैं तो क्या करें?

अगर खेत में खरपतवार पहले से निकल चुके हैं तो शुरुआती समय वाली दवा हर स्थिति में काम नहीं करेगी। ऐसी अवस्था में खरपतवार की किस्म और फसल की उम्र देखकर बाद में इस्तेमाल होने वाली दवा का चयन किया जाता है। ICAR की कृषि सलाह में कुछ परिस्थितियों में लगभग 20 दिन बाद घास वाले खरपतवार के लिए साइहेलोफॉप-पी-ब्यूटाइल और ज्यादा खरपतवार होने पर बिस्पाइरिबैक सोडियम या कुछ मिश्रित खरपतवारनाशी के विकल्प बताए गए हैं। लेकिन इन दवाओं को बिना पहचान और बिना सही मात्रा के इस्तेमाल करना फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।

सीधी बुवाई वाले धान में दवा अलग हो सकती है

सीधी बुवाई वाले धान में खरपतवार की समस्या रोपाई वाले धान से अलग हो सकती है। ICAR की सलाह में गीली सीधी बुवाई वाले धान के लिए बुवाई के शुरुआती दिनों में पाइराजोसल्फ्यूरॉन-एथाइल या प्रीटिलाक्लोर + सेफनर जैसे विकल्प बताए गए हैं। अगर खेत में बाद में खरपतवार ज्यादा हो जाएं तो स्थिति के अनुसार दूसरी दवा की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए डीएसआर खेत में रोपाई वाले धान की दवा और समय को सीधे लागू नहीं करना चाहिए।

खरपतवार की दवा डालते समय इन बातों का ध्यान रखें

खरपतवारनाशी का सही असर केवल दवा के नाम पर निर्भर नहीं करता। दवा की मात्रा, खेत में पानी की स्थिति, खरपतवार की अवस्था और छिड़काव का तरीका भी बहुत महत्वपूर्ण है। ICAR के खरपतवार अनुसंधान निदेशालय ने भी किसानों को दवा के सही चयन, सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से इस्तेमाल के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया है।

  • खेत में कौन सा खरपतवार है, पहले उसकी पहचान करें।
  • दवा की मात्रा हमेशा उत्पाद के स्वीकृत लेबल और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार रखें।
  • एक ही दवा को बार-बार बिना सलाह के इस्तेमाल न करें।
  • छिड़काव के समय फसल और आसपास के पौधों को नुकसान से बचाने के लिए सावधानी रखें।

क्या एक ही दवा से सभी खरपतवार खत्म हो जाएंगे?

धान में 100 प्रतिशत सभी खरपतवार खत्म करने के लिए एक ही दवा बताना सही नहीं है। अलग-अलग खरपतवारों पर अलग दवाओं का असर हो सकता है और कुछ खरपतवारों में दवा के प्रति कम असर की समस्या भी सामने आ सकती है। ICAR-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय ने हाल में खरपतवारों में खरपतवारनाशी के प्रति प्रतिरोध को एक उभरती चुनौती बताया है। इसलिए जरूरत के अनुसार दवा बदलना, सही समय पर नियंत्रण करना और खेत की स्थिति के हिसाब से दूसरी खरपतवार नियंत्रण विधियों को भी अपनाना बेहतर है।

हाथ से निराई भी है उपयोगी तरीका

जहां संभव हो, दवा के साथ खेत की निगरानी और समय पर निराई भी खरपतवार नियंत्रण में मदद कर सकती है। खासकर ऐसे खेतों में जहां कुछ खरपतवार दवा से पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो रहे हों, उन्हें बीज बनने से पहले निकालना जरूरी है। इससे अगले मौसम में खेत में खरपतवार के बीजों की संख्या बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है। खरपतवार प्रबंधन को केवल एक बार दवा डालने का काम नहीं मानना चाहिए, बल्कि पूरे फसल मौसम में खेत पर नजर रखना ज्यादा अच्छा तरीका है।

किसान सबसे पहले यह गलती न करें

खरपतवार ज्यादा दिखाई देने पर किसान अक्सर दवा की मात्रा बढ़ा देते हैं। यह तरीका सही नहीं है। ज्यादा दवा डालने से खरपतवार पर असर जरूरी नहीं कि बढ़ जाए, लेकिन फसल को नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह दो अलग दवाओं को अपनी तरफ से मिलाकर छिड़कना भी ठीक नहीं है। मिश्रण तभी करें जब उस फसल और उस खरपतवार के लिए उसकी स्पष्ट सिफारिश हो।

धान में खरपतवार रोकने के लिए सबसे जरूरी बात है कि दवा का चुनाव खेत की स्थिति देखकर किया जाए। रोपाई वाले धान और सीधी बुवाई वाले धान में खरपतवार नियंत्रण का तरीका अलग हो सकता है। शुरुआती अवस्था में सही नियंत्रण करने से बाद में खरपतवार की समस्या कम करने में मदद मिलती है।

किसान केवल “100 प्रतिशत खरपतवार खत्म” जैसे दावे देखकर कोई भी दवा न खरीदें। खरपतवार की पहचान, धान की अवस्था, दवा की स्वीकृत मात्रा और स्थानीय कृषि सलाह को ध्यान में रखकर ही खरपतवारनाशी का इस्तेमाल करें। इससे फसल को अनावश्यक नुकसान से बचाने और खरपतवार को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

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